*नव-सृजन प्रकाशन- नियम एवं शर्तें*

1. नव-सृजन प्रकाशन आपके सहयोग से आपकी रचनाएं प्रकाशित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
2. प्रकाशक का कर्तव्य  आपके उद्देश्यों को पूरा करना है। अर्थात आपकी सहभागिता अपेक्षित है।
3. नव-सृजन प्रकाशन द्वारा प्रकाशित पुस्तकें को हम पाठकों तक पहुंचाने के लिए दृढ़ संकल्पित है।
4. पांडुलिपि देने के पूर्व आप भूमिका/दो शब्द लिखवानी हो, वह लिखवा लें।
अपनी बात लिखना चाहें तो लिख लें।
पुस्तक का नाम, विषय-सूची, अनुक्रम, समर्पण आदि लिख लें, श्वेत-श्याम/रंगीन पासपोर्ट साईज चित्र भी भेज दें।
5. पांडुलिपि प्राप्त होने के पश्चात नव-सृजन प्रकाशन के सदस्यों में से कोई एक आपसे संपर्क साधेंगे.... आखिर इस रचना को प्रकाशित करवाने का उद्देश्य क्या है?
6. आपकी पांडुलिपि को नव-सृजन के सदस्यों द्वारा मूल्यांकन के पश्चात प्रकाशित करने की सहमति/असहमति फोन/ई-मेल के माध्यम से दिया जाएगा।
7. नव-सृजन प्रकाशन आपकी रचनाएं को बिल्कुल मुफ्त में प्रकाशित करने के लिए प्रतिबद्ध है। बशर्ते आपके पास पाठक हो, या फिर प्रकाशन से पूर्व आप पाठक तक पहुंचाने का रास्ता दिखाएं।
8. प्रकाशन से पूर्व या बाद में किसी प्रकार की धन-राशि की मांग नहीं करती है।
9. अगर आप अपनी ही रचनाएं लेना चाहेंगे, उस परिस्थिति में अंकित मूल्य से ४०प्रतिशत कटौती कर आपसे राशि ली जाएगी। कितनी प्रतियाँ चाहिए, यह पुस्तक प्रकाशन से पूर्व बताना होगा।
10. आपकी रचनाएं बिना आर्थिक सहयोग से प्रकाशित की जा रही है। इस जोखिम भरे कार्य में आप भी सहयोगी बनें। अपनी रचनाएं को अधिक से अधिक पाठकों तक पहुंचाना आपका भी कर्तव्य बनता है।

11. पुस्तक के आवरण पृष्ठ के पिछले हिस्से (पीछे का कवर) स्वतंत्र रूप से नव-सृजन प्रकाशन के अधिनस्थ है। जो विज्ञापन के लिए है। प्रकाशन मद् में संतुलन बनाने हेतु रखा गया है। जरूरत पड़ने पर पुस्तक के बीच-बीच में भी विज्ञापन का होना सुनिश्चित है। इसलिए कि आपकी रचनाएं उन्हीं के योगदान से मुफ्त में प्रकाशित हो रही है।
12. पुस्तक प्रकाशन के बाद आपको पांच लेखकीय प्रति भेजी जाएगी। इसके अतिरिक्त आप रचनाकार को भी ४०प्रतिशत कम करके किताबें खरीदनी होंगी।
13. प्रथम संस्करण की समस्त प्रतियाँ समाप्त होने के पश्चात पुस्तक का द्वितीय संस्करण प्रकाशित किया जाएगा। जिसका मूल्य प्रकाशन की नीतियों व बाज़ार के अनुसार तय होगा।
14. पुस्तक का कापीराइट लेखक के अधिन होगा। लेकिन दो वर्ष पश्चात ही आप किसी दूसरे प्रकाशन से पुस्तक छपवाने को स्वतंत्र होंगे।
15. नव-सृजन प्रकाशन रचनाकार को रोयाल्टी भी प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है, जो २०प्रतिशत के रूप में देय है। प्रत्येक छः महीने में इस राशि को चेक या फिर बैंक एकाउंट के माध्यम से दिया जाएगा।
16. किसी प्रकार के वाद-विवाद की स्थिति में न्याय क्षेत्र लखीसराय, बिहार होगा।

नोट:-स्तरीय रचनाओं को ही प्राथमिकता दी जाएगी, इसके चुनाव के लिए प्रकाशक मण्डल स्वतंत्र है, रचनाएँ एकसाथ ही हमारे email:--- info.navsrijan@gmail.com पर ms word में फाइल बना कर हिंदी फॉन्ट में (मंगल,कृतिदेव आदि में नहीं) भेजें, जिससे प्रकाशक को सुविधा हो
सादर.......
नव-सृजन प्रकाशन

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